राजपूती शान सिर्फ़ तस्वीरों में नहीं, ज़िम्मेदारी में दिखनी चाहिए
आज राजपूत समाज में सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि
हम केवल पोशाक, फोटो, स्टेटस तक सिमटते जा रहे हैं,
जबकि शिक्षा, एकता, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी बहुत पीछे छूट रही है।
आज सोशल मीडिया पर राजपूत समाज की पहचान केवल
तलवार, साफा, गहने और royal photos तक सीमित होती जा रही है।
इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन सवाल ये है कि
👉 क्या हमारी पहचान सिर्फ़ दिखावे तक रहनी चाहिए?
आज हमे ज़रूरत है:
- शिक्षा को प्राथमिकता देने की
- युवाओं को दिशा देने की
- समाज में एक-दूसरे के लिए खड़े होने की
- संस्कारो को निभाने की बजाय इसके सिर्फ दिखावे की
- करियर में आगे बढ़कर समाज को आगे बढाने की
- और राजपूती मूल्यों को जीने की
राजपूती पहनावा सिर्फ़ पहनावा नहीं, त्याग, साहस, अनुशासन और जिम्मेदारी का नाम है। जैसे कि आज कल साफो और पगड़ियो का महत्व कम और दिखावा ज्यादा हो रहा है । साफा धारण किया फिर उतार दिया फिर रख दिया मतलब उसके प्रति सम्मान बहुत कम हो रहा है । क्या आप जानते है आपके हर वंश के साफे या पगड़ी की एक मर्यादा और सम्मान है , वो हम केवल दिखावे या फेशन के लिए धारण नही करते हैं । युद्ध में रक्त बहाकर हमने इस सम्मान को पाया और हम आज हर परम्परा को मिश्रित करके अपने संस्कृति और परम्परा से दूर भटक रहे हैं ।
अगर हम सिर्फ़ तस्वीरों में रॉयल हैं और समाज के मुद्दों पर खामोश हैं, तो आने वाली पीढ़ी हमें सिर्फ़ “पोस्ट करने वाला समाज” कहेगी।
ऐसा नहीं है कि पोस्ट करना या दिखाना या फोटो लेना उन्हें सोशल मीडिया पर डालना गलत है , नही बिल्कुल नही , आप कीजिये परन्तु मान्यताओ और परम्पराओ का सम्मान भी कीजिये और इसे सिर्फ फोटो और दिखावे की रील तक मत समेटिये , इसे जमीनी स्तर पर साकार कीजिये ।
याद रहे हम सिर्फ कपड़ो से नही , हमारे संस्कारो, बोली, मर्यादा से जाने जाते हैं और सम्मान पाते हैं पर आज हम दिखावे में ज्यादा जी रहे है तो हमे इस पर विचार करना होगा ।
आशा है मेरी बातो को आप सकारात्मक रूप से समझेंगे और समाज के लिए सोचेगे ।
अब समय है तय करने का —
👉 हम दिखना चाहते हैं या बनना चाहते हैं?
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