राजपूतानी नारी को केवल परदे और त्याग से जोड़ना
इतिहास के साथ अन्याय है।
राजपूतानी ने
राजमहल भी संभाले,
रणभूमि में निर्णय भी दिए,
और संकट के समय नेतृत्व भी किया।
पद्मिनी, कर्णावती, दुर्गावती —
ये नाम केवल इतिहास के पन्नों में नहीं,
बल्कि राजपूती चेतना में जीवित हैं।
आज की राजपूतानी
शिक्षा, करियर और समाज में आगे बढ़ रही है,
लेकिन वह अपनी मर्यादा नहीं छोड़ती।
राजपूतानी की शक्ति
उसकी सोच में है,
उसकी दृढ़ता में है,
और उसके संस्कारों में है।