इतिहास हमेशा निष्पक्ष नहीं लिखा गया।
राजपूतों के साथ भी यही हुआ।
कई जगह राजपूतों को
हठी, विभाजित या पराजित बताया गया,
लेकिन उनके त्याग, बलिदान और सिद्धांतों को
जानबूझकर छोटा किया गया।
राजपूतों ने
आक्रमणकारियों से समझौता नहीं किया,
इसलिए उन्हें “हारने वाला” कहा गया।
लेकिन सच्चाई यह है कि
जो झुका नहीं — वही राजपूत था।
आज ज़रूरत है
इतिहास को नए दृष्टिकोण से पढ़ने की,
और आने वाली पीढ़ी को
सच बताने की।